स्किल्स बनाम डिग्री: आज भारत में नौकरी के लिए क्या ज्यादा मायने रखता है?
भारत का रोजगार बाजार तेजी से बदल रहा है। कई दशकों तक
डिग्री को सफलता और अच्छी नौकरी की गारंटी माना जाता था। कॉलेज की डिग्री
प्रतिष्ठा का प्रतीक थी और माना जाता था कि इससे करियर सुरक्षित हो जाएगा। लेकिन
अब यह सोच बदल रही है। कंपनियाँ अब सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि वास्तविक कौशल, अनुभव और सीखने की क्षमता को ज्यादा महत्व दे
रही हैं।
भारत में
स्किल्स बनाम डिग्री
आज “स्किल्स बनाम डिग्री” की चर्चा इसलिए बढ़ी है क्योंकि
शैक्षणिक योग्यता और उद्योग की जरूरतों के बीच अंतर साफ दिखाई दे रहा है।
डिग्री से सैद्धांतिक ज्ञान मिलता है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि वह व्यक्ति को
कार्यस्थल के लिए पूरी तरह तैयार कर दे। कई सर्वे बताते हैं कि भारत में लगभग 80% नियोक्ता अब स्किल-फर्स्ट हायरिंग को
प्राथमिकता दे रहे हैं।
इसका मतलब है कि वे यह देखना चाहते हैं कि उम्मीदवार क्या
कर सकता है, न कि केवल
उसने क्या पढ़ा है।
स्किल्स
क्यों हो रहे हैं ज्यादा महत्वपूर्ण?
डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन,
ऑटोमेशन और एआई के दौर में नौकरी की प्रकृति बदल चुकी है।
आज कंपनियों को ऐसे लोग चाहिए जो:
- नई तकनीक जल्दी सीख सकें
- समस्याओं का समाधान कर सकें
- वास्तविक प्रोजेक्ट्स पर काम करने का अनुभव रखते हों
- बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढाल सकें
डिग्री बुनियादी समझ देती है, लेकिन कई बार वह व्यावहारिक चुनौतियों के लिए पर्याप्त नहीं
होती। इसलिए कंपनियाँ अब प्रैक्टिकल स्किल्स को नौकरी के प्रदर्शन का बेहतर संकेतक
मान रही हैं।
उच्च
शिक्षा में आ रहा बदलाव
स्किल्स और डिग्री की इस बहस ने शिक्षा व्यवस्था को भी
प्रभावित किया है। अब कॉलेज और यूनिवर्सिटी उद्योग के साथ मिलकर ऐसे कोर्स डिजाइन
कर रहे हैं जिनमें:
- इंटर्नशिप
- लाइव प्रोजेक्ट
- इंडस्ट्री ट्रेनिंग
- हैंड्स-ऑन लर्निंग
शामिल हों।
उदाहरण के तौर पर, NIIT
University और Medhavi Skills University जैसे संस्थान
पढ़ाई के साथ व्यावहारिक अनुभव पर जोर दे रहे हैं।
इसी तरह Great Lakes Institute of Management के
शिक्षाविदों का भी मानना है कि यदि पाठ्यक्रम उद्योग की जरूरतों से जुड़ा नहीं
होगा, तो डिग्री का महत्व कम हो जाएगा।
भारत के
जॉब मार्केट में स्किल-बेस्ड हायरिंग
भारत में अब भर्ती प्रक्रिया बदल रही है। कंपनियाँ
उम्मीदवारों का मूल्यांकन इस आधार पर कर रही हैं कि:
- उन्होंने कौन-से प्रोजेक्ट किए हैं
- वे किस समस्या को कैसे हल करते हैं
- उनके पास कौन-सी तकनीकी और व्यवहारिक स्किल्स हैं
आईटी, फिनटेक, डिजिटल
मार्केटिंग और एआई जैसे क्षेत्रों में तो यह बदलाव और तेज है। यहाँ प्रोग्रामिंग, डेटा एनालिसिस, कम्युनिकेशन और क्रिटिकल थिंकिंग जैसी क्षमताएँ डिग्री से
ज्यादा मायने रखती हैं।
क्या
डिग्री अब बेकार हो गई है?
ऐसा नहीं है कि डिग्री का महत्व खत्म हो गया है। बल्कि उसका
उद्देश्य बदल रहा है।
अब डिग्री केवल कागजी प्रमाणपत्र नहीं, बल्कि स्किल्स और क्षमता का प्रमाण बन रही
है। इंटर्नशिप, इंडस्ट्री
प्रोजेक्ट और नई शिक्षा नीतियाँ डिग्री को ज्यादा प्रासंगिक बना रही हैं।
जैसा कि Medhavi Skills University के संस्थापक
का मानना है, भारत डिग्री
को खत्म नहीं कर रहा, बल्कि उसे
स्किल्स के साथ जोड़कर नया रूप दे रहा है।
निष्कर्ष
आज के भारत में सवाल “स्किल्स या डिग्री?” का नहीं है,
बल्कि “स्किल्स + डिग्री” का है।
डिग्री आधार देती है, लेकिन सफलता के लिए जरूरी है:
- लगातार सीखना
- व्यावहारिक अनुभव
- नई तकनीक अपनाने की क्षमता
जो युवा अपनी पढ़ाई के साथ-साथ प्रैक्टिकल स्किल्स पर ध्यान
देंगे, वही बदलते
जॉब मार्केट में आगे रहेंगे।
अब csc के साथ जुड़कर हर कोई आशानी से skill सिख कर अपने आप को कामयाब बना सकता है
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